Meri yadon ka Jharokha: bachpan ki kitab: बचपन की किताब बचपन बचपन के ख्वाब वो फिर खुली किताब वो पल हर पल याद आते हैं वो छोटी सी कालिया जो सुख गयी वो कहा खिली वो दोस्ती ज...
बचपन की किताब बचपन बचपन के ख्वाब वो फिर खुली किताब वो पल हर पल याद आते हैं वो छोटी सी कालिया जो सुख गयी वो कहा खिली वो दोस्ती जो टूट गयी वो कहा मिली वो तेरा रूठना वो मेरा मानना वो दोस्तों का मुस्कराना और कहना चल छोड़ यार झगड़ा करना वो लड़ना वो बहनो से घंटो बाटें करना और भाई की चुगली करना। वो बचपन में कैरम खेलना कार्ड्स खेलना। वो चिडया का चहकना वो खिली धुप का आके सीधा आंखौं पर पड़ना वो मम्मी का उठाना उठ जाओ अब स्कूल हैं जाना वो स्कूल में लंच बॉक्स लेकर जाना और दोस्तों का लंच बॉक्स शेयर करना वो दोस्तों से घंटो बातें करना और एग्जाम टाइम में पढ़ाई का स्ट्रेस लेना एक दिन पहले डिसकस करना तूने यह चैप्टर किया की नहीं तेरी कितनी पढ़ाई हो गयी हैं वो फ़ोन पर घंटो बातें करना और सो जाना वो कितबो से जुड़ना उन्हें अपना दोस्त बनाना वो कितबो के कहानियों के पनो में खो जाना बचपन की वो सारि सहेलिया वो घंटो खेलना , जुड़े गुडियो की वो शादी करना छुपा छुपी खेलना वो बारिश में कागज़ की कश्ती बनाना बारिशे में मम्मी के...
kuch pal beet jaate hain kuch pal yaad reh jate hain zindagi ke is safar mein hum bas behte chale jate hain reh jaati hain beete hue pal ke lamhe jo hawa ke jhoko ke saath kabhi yaad aati hain to kabhi bhul jaati hain zindagi ke is safar mein yaadon ke is zarookho mein , yadoon ke jharoko mein hum behte chale jate hain nadiyon ki lehro ki tarah kabhi idhar kabhi udhar samundar ke is beech manjhar, mein faste chale jate hain khusiyon ko samate hue yadoon ki lehron mein ek kitab likhte chale jaate hain bas ek kitab likhte chale jate hain Chalo bahut hua aab yaddon ko yaad karni is kitab ko band kar ek nayi kitab ki shuraat kar or nayi yadoon ke saath zindagi ke haseen lamhe lehro ke saath banate chal.. banate chal @Anamika meri yadoon ke zarookhe
महक मेरे आँगन की चली जाएगी एक दिन.... मेरी परछाइयी मेरी बेटी जिससे बानी मेरी छवि मुझे मिला एक नया नाम माँ आज लेकर आयीं में हर माँ की कहानी अपनी ज़ुबानी बेटी बनकर आयी जब मेरे आँगन में उसकी हसी में मेरी ख़ुशी आज बन गयी मेरी हसी मेरे आँगन की महक है मेरे दिल की धड़कन हैं , वो नन्हे कदमो की आहट वो मेरे जीवन की चाहत वो मेरे आँचल में आकर छुपना और मुस्कुराते हुए अपनी शरारतो को छुपाना वो हाथो में मेहँदी लगवाना वो ख्वाबो में खो जाना और नयी सुबह के साथ नयी शरारतो का झोला लेकर अपने आँगन में फिर से उनकी बोछार करना अपनी हसी से सब के दिल में बस जाना अपने दिल में ढेरो सवाल लिए बाते करना पूरे घर में चिडया की तरह इधर उधर हस्ते हुए मुस्कुराते हुए अपनी हसी की गूँज से मेरे आँगन को महकाना ...
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