bachpan ki kitab

बचपन की किताब


बचपन
बचपन के  ख्वाब
वो फिर खुली किताब
वो पल
हर पल याद
आते हैं
वो छोटी सी कालिया
जो सुख गयी वो कहा खिली
वो दोस्ती जो टूट गयी वो कहा मिली
वो तेरा रूठना वो मेरा मानना
वो दोस्तों का मुस्कराना
और कहना चल छोड़ यार


झगड़ा करना
 वो लड़ना वो
बहनो से घंटो बाटें करना  और
भाई की चुगली करना।
वो बचपन में
कैरम खेलना
कार्ड्स खेलना।

वो चिडया का चहकना
वो खिली धुप का आके
सीधा आंखौं पर पड़ना
वो मम्मी का उठाना
उठ जाओ अब स्कूल हैं जाना

वो स्कूल में लंच बॉक्स लेकर जाना
और दोस्तों का लंच बॉक्स शेयर करना
वो दोस्तों से घंटो बातें करना
और एग्जाम टाइम में
पढ़ाई का
स्ट्रेस लेना
 एक दिन पहले डिसकस करना
तूने यह चैप्टर किया की नहीं
तेरी कितनी पढ़ाई हो गयी हैं
वो फ़ोन पर घंटो बातें करना
और सो जाना


वो कितबो से जुड़ना
उन्हें अपना दोस्त बनाना
वो कितबो के कहानियों
के पनो में खो जाना

बचपन की वो सारि  सहेलिया
वो घंटो खेलना ,
जुड़े गुडियो की वो शादी करना
छुपा छुपी खेलना
वो बारिश में
कागज़ की कश्ती बनाना
बारिशे में   मम्मी  के हाथ की पकोड़े को खाना

गरमी   की छुटियों
में नानी  के यहाँ जाना
नानी के हाथ के खाने  की  यादें
वो जलेबी , वो गुलाब जामुन
वो
वो मम्मी का  रोकना
वो पापा का डाटना
वो डाट से मेरी बहिन का
बचाना
और कहना जाने दो छोटी हैं


वो बचपन की आइसक्रीम
वो बचपन का पागलपन
पानी पूरी की यादें

बहिन भाई का प्यार अनोखा
वो टीवी केलिए  लड़ना
अभी मेरा टर्न हैं
अभी मेरा टर्न हैं
वो क्रिकेट के टाइम सब एक हो जाना
और हसना और रोना
वो खेलना और खिलाना

बचपन के  किताबों के पन्नो
को समेटते  जाना
युहीं लिखते चले जाना।





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